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शनिवार, 30 दिसंबर 2017
सोमवार, 25 दिसंबर 2017
क्या अन्जाने में आप पानी से बढ़ा रहे है अपनी चर्बी । Are you unknowingly increasing your fat with water?
क्या अनजाने में आप पानी से बढ़ा रहे हैं अपनी चर्बी
क्या अनजाने में आप पानी से बढ़ा रहे हैं अपनी चर्बी
आज के इस लेख में हम बताएंगे कैसे आप अनजाने में अपने शरीर की चर्बी बढ़ा रहे हैं।
बहुत सारे लोगों को पानी पीने के सही तरीका के बारे में जानकारी नहीं होती है जिसके कारण जाने अनजाने में इसका दुष्परिणाम लोगों को झेलना पड़ता है इसलिए पानी पीने का सही तरीका सबको पता होना चाहिए।
आईये पानी पीने का सही तरीका जाने
हम सभी लोगों में बहुत सारे लोग जो खाने-पीने का सही तरीका नहीं जानते हैं जिसके कारण से उसके दुष्परिणाम उनके सामने आ जाते हैं।
- भोजन करने के तुरंत बाद एवं पहले पानी नहीं पीना चाहिए।
- इसी प्रकार से भुने हुए चने खाने के बाद तुरंत पानी नहीं पीना चाहिए।
- खाने के बाद पीया गया पानी पाचन क्रिया को मंद कर देता है और शरीर में चर्बी को बढ़ाता है और ताकत को भी कम करता है।
- स्वाद लेकर घुट घुट पानी पीने से पानी में लार की अधिकतम मात्रा मिल जाती है जो अंदर जाकर रक्त शुद्धि का कार्य करती है।
- सुबह सूर्योदय से पहले पानी पीने से पेट साफ होता है।
- सोने से पहले पानी पीने से नींद अच्छी आती है।
- एक बात और सुबह पानी पीने से आलस दूर होता है।
- भोजन करने से एक या डेढ़ घंटे पहले पानी पी सकते हैं और भोजन करने के 1 घंटे बाद पानी पी सकते हैं।
- क्रोध , भय , मूर्छा ,शोक या चोट लगने पर शरीरअन्तःस्त्रावी ग्रन्थिओ हानिकारक स्राव करती है। इस स्राव के प्रभाव को कम करने के लिए पानी पीना चाहिए।
- परिश्रम में व्यायाम में भी पानी ज्यादा खर्च होता है इसलिए व्यायाम के 1 घंटे बाद ही पानी पीना चाहिए।
- पथरी, पीलिया, मोटापा ,कब्ज, रक्तचाप, बुखार, जुकाम, दमा,काली खांसी, निमोनिया और मूत्र संबंधित संक्रमण को कम करने के लिए बार-बार पानी पीना चाहिए।
- दिन में दो या तीन घंटे के अंतराल में पानी पीना अवश्य चाहिए इससे अन्तःस्त्रावी ग्रंथियां संक्रिया रहती है।
- पानी पीने से शरीर तरो ताजा एवं स्वास्थ्य बना रहता है।
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शनिवार, 23 दिसंबर 2017
भारतीय दुनिया के सबसे गंदे आदमी है। कैसे ? Indian is the world's most di...
भारतीय दुनिया के सबसे गंदे आदमी है कैसे
भारतीय दुनिया के सबसे गंदे आदमी है कैसे ?
आज के लेख में हम बताएंगे कि कैसे भारतीय दुनिया के सबसे गंदे आदमी हैं ? भारतीय जन समुदाय में अनपढ़, गरीब इनकी संख्या अधिक होने से उनके अंदर सामान्य चीजों के प्रति भी जागरूकता नहीं देखी जाती है। इसके लिए जिम्मेदार है यहां की व्यवस्था, यहां अयोग्य लोगों का शासन है ,यहां की सरकारें जाति धर्म और निजी स्वार्थ से ऊपर उठ नहीं पा रही है। पूरे देश को देखने के बाद यही मालूम होता है जितने जिम्मेदार लोग हैं उसमें से एक प्रतिशत लोग भी पढ़े लिखे नहीं है क्योंकि पढ़ा लिखा व्यक्ति जाति धर्म जैसी निराधार बात को मानता ही नहीं है। क्योंकि यह मूर्खता एवं अंधविश्वास का मार्ग है। यहां का शासक वर्ग यहां की जनता को जान बूझकर अशिक्षित और लाचार बनाकर रखा है जिससे कि शासन करना आसान हो जाए। इसलिए दुनिया में भारत की छवि बहुत ही खराब दिखती है। ऐसे ही एक अंतर्राष्ट्रीय एजेंसी द्वारा अध्ययन एवं विश्लेषण पर यह पाया गया है कि भारत के लोग अजागरूक एवं बेहद लापरवाह होते हैं।
इसके बारे में आईये और जानकारी प्राप्त करते हैं
जहां पूरे दुनिया में जल संचय एवं जल शुद्धता की बात हो रही है उसके लिए भिन्न-भिन्न प्रभावी कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं परंतु भारत में ढोंग एवं अंधविश्वास के कारण से इसके साथ साथ मूर्खतापूर्ण व्यवस्था के कारण से लगातार नदियों के पानी को गंदा किया जा रहा है। एक बड़ा वर्ग समुदाय जो इस पर चिंता करता रहा है कि जल संकट का आखिरकार कारण क्या है तो बात सामने आती है, वह है जल प्रदूषण।
जहरीले कीटनाशक पदार्थ एवं रासायनिक खादों का नाइट्रेट भूजल में लगातार मिल रहा है, बढ़ते उद्योगों से निकाला गया वेस्ट पदार्थ और गंदगी अधिकतर नदियों में गिरायी जा रही है। इससे नदियां गंदे नालों में बदल चुकी है। इसके अलावा पूरे शहर का कचरा नदियों में गिराया जा रहा है।
नदियों के गंदगी के हिसाब से सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (center for science and environment ) के अनुसार पांचवें नागरिक को पर्यावरण रिपोर्ट मे भारतीयों को सबसे गंदे आदमी की उपाधि दे चुकी है। सन 1990 के दशक में भारत में 10 लाख से ज्यादा बच्चे एवं नागरिक जल जनित रोगों से अकाल मृत्यु के शिकार हुए।
आजादी के बाद से अब तक गंदे पानी की वजह से 5 करोड़ से ज्यादा बच्चे जान गंवा चुके हैं। गंगा एक्शन प्लान ( GAP ) से पहले गंगा में 87 करोड़ 30 लाख लीटर गंदगी हर रोज बहाई जा रही थी।
एक छोटी सी नदी साबरमती भी अहमदाबाद शहर का 99 करोड़ 80 लाख लीटर गंदा पानी हर रोज ढ़ो रही है।
इस प्रकार कहा जा सकता है की नदियों के गंदा होने का कारण यहां की कंपनियां, कारखाने एवं यहां के लोग ही हैं।
धन्यवाद
गुरुवार, 21 दिसंबर 2017
बुधवार, 20 दिसंबर 2017
मानव की लापरवाही से हो सकता है विश्व युद्ध | Human negligence can lead to world war.
मानव की लापरवाही से हो सकता है विश्व युद्ध
मानव की लापरवाही से हो सकता है विश्व युद्ध
आज इस लेख में बताएंगे कि मानव की लापरवाही से हो सकता है विश्व युद्ध
धरती पर से जितने भी जीव हैं उन सारे जीवों में मनुष्य ही सबसे लापरवाह जीव है। मानव सभ्यता के विकसित एवं विकास के क्रम में मनुष्य अपने स्वार्थ के आधार पर ही काम करता रहा है और आश्चर्य की बात है कि विकास के प्रारम्भ से भी यही बात थी और आज भी यही बात है परंतु मनुष्य को पृथ्वी पर कोई भी गतिविधि करने से पहले यह ध्यान देना चाहिए कि जनजीवन और पर्यावरण पर इनका क्या प्रभाव पड़ेगा काफी लंबे समय से मानव समूह जल संसाधनों का उपयोग करता रहा है परंतु उचित और न्याय संगत प्रक्रिया से पीछे रहा है इस कारण पूरे विश्व में जल का अभाव होने के कारण से विश्व युद्ध की स्थिति बन सकती है। इस लेख में जल से संबंधित समस्याओं को दर्शाया गया जो विशेष ध्यान देने योग्य है
आईये और आगे बढ़े
भारत में अजीब बिडंबना है जो जगह-जगह देखने को मिलती है। कहीं जमीन पानी की प्यासी है तो कहीं भयंकर बाढ़ देखने को मिलता है। एक आंकड़े के अनुसार चार करोड़ हेक्टेयर भूमि ऐसी है जहां हर साल बाढ़ आने की आशंका बनी रहती है। हर साल औसतन 80 लाख हेक्टेयर भूमि बाढ़ की त्रासदी का शिकार हो जाती है। इस प्रकार 37 लाख हेक्टेयर फसल बाढ़ से बर्बाद हो जाती है। समुद्री तूफ़ान भी मनुष्य की लापरवाही से ही आते हैं। पूरी दुनिया के वैज्ञानिक, जलवायु परिवर्तन से काफी चिंतित है वैज्ञानिकों का कहना है कि कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य गैसों की मात्रा बढ़ने से सूरज की गर्मी धरती की हवा में कैद रह जाती है और लौट कर वापस नहीं जा पाती है। ओजोन की परत जो छतरी की तरह तीव्र पराबैंगनी किरणों को रोकती रही थी वह जगह-जगह से फट रही है क्योंकि उसे क्लोरोफ्लोरोकार्बन जैसी गैसे खाती जा रही है।
धरती गर्मा रही है इसलिए अगली सदी में औसतन तापमान बढ़ने से मिट्टी में नमी और वर्षा के अनुपात में बदलाव आएगा गर्माती धरती दुनिया के मीठे पानी के आपूर्ति में बदलाव कर सकती है। धरातल के औसतन तापमान में मामूली बढ़त भी हिम नदी एवं बर्फीली चोटियों को पिघला सकती है जिससे समुद्र का जल स्तर ऊंचा हो सकता है। इस कारण से समुद्र तट के पास वाले इलाकों को तूफानी लहरों का सामना करना पड़ेगा। समुद्र की सतह का तापमान बढ़ने से उष्णकटिबंधीय चक्रवात बनते हैं।
लगातार धरती का तापमान बढ़ रहा है तथा साथ ही साथ जल संकट भी बढ़ रहा है इस समस्या के पीछे मनुष्य ही कारण है क्योंकि सबसे ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाला मनुष्य ही है। जल संकट के बढ़ने का असर इन विवादों में दिखाई पड़ रहे हैं जो नदियों के पानी के बंटवारे को लेकर उत्पन्न हो रही है। यह समस्या पूरी दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही है।
दुनिया में 13 नदिया और झीलें ऐसी है जो 96 देशो के हिस्से में आती है। कम से कम 214 नदियों के कछार ऐसे है जो कई देशों में स्थित है जैसे की 57 अफ्रीकी देशों में और 48 यूरोपीय देशो में।
यूरोप में चार या इससे अधिक देशों में पानी के बंटवारे को लेकर 175 से अधिक समझौते भी हुए हैं। फिर भी पानी को लेकर मारामारी होती रहती है। खास तौर पर निकट पूर्वी देशों में यह समस्या देखने को मिलती है। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम इसको शार्ट फॉर्म में UNEP भी कहते हैं। इसके अधीन जो देश नदी घाटी को आपस में बाट कर शांति भाव से पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें जल संसाधनों के प्रबंधकों के लिए प्राथमिकता के आधार पर सहायता दी जाती है।
आठ अफ्रीकी देश एक नदी ज़ाम्बेज़ी के पानी का मिलजुल कर इस्तेमाल कर रहे हैं और इन्हे UNEP ने आर्थिक सहायता भी दी है।
यदि दुनिया के लोग पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों का ठीक से उपयोग नहीं करेंगे तो पूरी दुनिया के लिए समस्या हो सकती है। क्योंकि प्रदूषण से ही यह सारी समस्या उत्पन्न होती है और लापरवाही और अनजाने में ही पूरी दुनिया के लोग विश्व युद्ध की स्थिति उत्पन्न कर लेंगे।
आप सभी पाठको से नम्र निवेदन है कि पर्यावरण की रक्षा हेतु स्वयं को जागरूक करें और दूसरों को भी इस लेख को शेयर जरूर करें धन्यवाद।
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